भारत का इतिहास

मुख्यपॄष्ट

देश की सर्वोच्च परीक्षाओं में से एक ‘सिविल सेवा परीक्षा’ को लेकर कौतूहल की स्थिति छात्रों में हमेशा बनी रहती है। वर्तमान में युवा पीढ़ी अपने रोजगार और करियर के लिए काफी आशंकित है। आज समाज का हर युवा चाहता है कि उसे अच्छी से अच्छी नौकरी मिल जाए ताकि अपना जीवन सपरिवार खुशीपूर्वक व्यतीत कर सके, इसलिए आज का युवा सिविल सेवा के क्षेत्र में करियर बनाने हेतु जी-जान से जुटा हुआ है।  


सिविल सेवा देश की सर्वाधिक मर्यादित, आकर्षक एवं चुनौतीपूर्ण सेवा है, जिसमें शामिल होने की तमन्ना प्रायः सभी विद्यार्थियों की होती है । ब्रिटिशकाल से संबंधित आईसीएस सेवाओं में जो आकर्षण ब्रिटिशकाल में था उसमें आज भी कोई कमी नहीं आई है । भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ सिविल सेवा है । देश में नीतियों का निर्माण और उनके कार्र्यान्वयन की बागडोर मुख्यतः सिविल सेवकों के हाथों में होती है । यही कारण है कि भारत जैसे विकासशील देश में सिविल सेवकों का महत्व एवं सामाजिक पहचान विशेष तौर पर बढ़ गई है ।

सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने के लिए किन-किन बातों की अहमियत होती हैं?
इस परीक्षा का आधारभूत स्तर किस तरह का होता है?
नए पैटर्न व प्रश्नों में किस तरह का बदलाव आ रहा है?
 
इन्हीं सब जिज्ञासाओं को शांत करने का अवसर आपको देता है ये वेबपत्र – ” विजय-मित्र
 
सिविल सेवा की तैयारी हेतु आवश्यक है कि उसकी प्रक्रिया की संपूर्ण जानकारी विद्यार्थी के पास उपलब्ध हो । यहाँ इसकी जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है । भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस), भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) सहित संघ व केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासनिक सेवाओं में भर्ती हेतु संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) एवं राज्य की प्रशासनिक सेवाओं में भर्ती हेतु राज्य लोकसेवा आयोग (स्टेट पीएससी) द्वारा प्रतिवर्ष प्रतियोगी परीक्षा का आयोजन किया जाता है । सिविल सेवा परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की जाती है । प्रथम प्रारंभिक, द्वितीय मुख्य एवं तृतीय साक्षात्कार परीक्षा ।
 
मुख्य परीक्षा में है कुंजी सफलता की
 
सिविल सेवा में अपनी योग्यता व प्रतिभा साबित करने की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण चरण है-मुख्य परीक्षा । सिविल सेवा में चयन के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है, क्योंकि विभिन्न प्रश्नपत्रों में दिए गए अंकों से ही आपकी सफलता की दिशा तय होती है । जरा-सी लापरवाही या चूक आपकी सारी मेहनत पर पानी फेर सकती है । मुख्य परीक्षा निबंधात्मक प्रकृति की परीक्षा है, जिसमें अनिवार्य और वैकल्पिक मिलाकर कुल नौ विषयों की परीक्षा देनी होती है । ( म.प्र.. आदि राज्यो मे सात विषय है। ) सामान्य हिन्दी (या कोई अन्य भारतीय भाषा) और सामान्य अंग्रेजी के अनिवार्य पेपर (म.प्र. मे केवल सामन्य हिन्दी का पेपर होता है) (दोनों 300-300 अंक के) केवल क्वालिफाइंग नेचर के होते हैं, यानी इसमें केवल आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम अर्हक अंक पाना होता है । इसके अंक मेरिट लिस्ट बनाते समय नहीं जोडे जाते । इसके बाद शुरू होता है अंकों का असली खेल, जिनमें अनिवार्य विषय के तहत निबंध का प्रश्नपत्र (200 अंक का) {म.प्र. मे निबंध सामन्य हिन्दी के पेपर मे ही होता है} और सामान्य अध्ययन के दो प्रश्नपत्र (प्रत्येक 300 अंक का) तथा अभ्यर्थी द्वारा चुने गए दो वैकल्पिक विषयों के दो-दो प्रश्नपत्र (प्रत्येक प्रश्नपत्र 300 अंक का) शामिल होते हैं । मुख्य परीक्षा के बाद 300 अंक (म.प्र. मे २५० अंक) का इंटरव्यू भी होता है ।
 
अब यदि आपको सिविल सेवा परीक्षा में अपनी सफलता सुनिश्चित करनी है, तो एक महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए-मुख्य परीक्षा के सभी प्रश्नपत्रों में अधिक से अधिक स्कोर करना । यदि आप सभी प्रश्नपत्रों में अधिकाधिक अंक हासिल करेंगे, तो सिविल सेवा में आपका चयन काफी हद तक सुनिश्चित हो जाएगा । आमतौर पर माना जाता है कि सभी प्रश्नपत्रों में कम से कम 60 प्रतिशत या कुल मिलाकर औसत 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी इस चरण में उत्तीर्ण हो जाते हैं । सामान्यतया ऐसे अभ्यर्थी 300 अंक के इंटरव्यू में भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं और आखिरकार सिविल सेवा के लिए चुने जाने वाले सफल लोगों की लिस्ट में अपना स्थान पक्का कर लेते हैं ।
 
मुख्य परीक्षा के कुल 2000 अंकों में से यह आप पर निर्भर करता है कि इसमें से कितने अंक बटोर पाते हैं! आप मुख्य परीक्षा में जितने ज्यादा अंक पाएंगे, उससे न केवल इस परीक्षा में आपकी सफलता पक्की होगी, बल्कि आप मेरिट लिस्ट में ऊपरी स्थान पाकर प्रॉपर आईएएस, आईपीएस, आईएफएस तथा राज्य सेवा के अधिकारी या समकक्ष कैडर के अधिकारी बन सकेंगे ।
 
इस वेबपत्र मे मुख्य रूप से इतिहास, हिन्दी साहित्य, लोकप्रशासन, सामान्य अध्ययन, समसामयिकी आदि की पाठ्यक्रमानुसार सामग्री दी जा रही है। यह विशेष ध्यान देने योग्य बात है कि हिन्दी साहित्य अच्छे अंक देने वाला विषय है किन्तु मध्यप्रदेश में इस विषय की पाठ्य सामग्री तथा कोचिंग संस्थान उपलब्ध नही है जबकि इस विषय का सफलता का प्रतिशत भी काफ़ी अच्छा है।  अतः इस अंकदायी विषय की पाठ्य सामग्री विशेष रूप से इस वेबपत्र पर इसी आशा के साथ प्रेषित कर कर रहा हूं कि यह आपके लिये सहायक होगी।

 
– मिथिलेश वामनकर

9 Responses to "मुख्यपॄष्ट"

i want veb patrabecause i learn it . iwant to fight mp psc . and i hope it is verey good book

1767 se 1799 tak Angal-maisoor sabandh ki vyakhya

Please given the details of SSC Examination in subject- Legal.
2008

pls provide me every important note for prepairing PSC exam.


बेहतरीन दस्तावेज़ीकरण,
क्या मैं इस ब्लाग का लिंक
अपने पृष्ठ पर बिना अनुमति दे सकता हूँ ?

आप मेरे ब्लोग की की लिन्क बेझिझक प्रयोग करे। हौसला अफ़जाई का शुक्रिया।

u r blog is very useful for prepration. keep it up.

आप जैसे महाज्ञानी महामानव का आशिर्वाद प्राप्त होता रहे तो “कीप इट अप” वाली हौसला अफ़जाई अवश्य साकार होगी। इस सराहना के लिये आपका बहुत बहुत धन्यवाद। ये ब्लॊग प्रतिभागीयो के लिये सहायक हो रहा है इससे बड़ी और क्या बात हो सकती है मेरे लिये। ईश्वर का धन्यवाद कि मेरा यह प्रयास भी सफ़ल हो रहा है।
आपका स्नेही कनिष्ट मिथिलेश

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प्रत्याख्यान-

यह एक अव्यवसायिक वेबपत्र है जिसका उद्देश्य केवल सिविल सेवा तथा राज्य लोकसेवा की परीक्षाओं मे हिन्दी माध्यम के लोकप्रिय विषय इतिहास लेने वाले प्रतिभागियों का सहयोग करना है। यदि इस वेबपत्र में प्रकाशित किसी भी सामग्री से आपत्ति हो तो इस ई-मेल पते पर सम्पर्क करें-

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संपादक- मिथिलेश वामनकर

 

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